जुले लद्दाख – ( Part 4) By Rati Saxena
अगले दिन हमे जल्दी निकलना था, क्यों कि यह जरा लम्बी यात्रा थी। कई मील की दूरियों पर बसे कुछ गोम्फाओं की यात्रा थी। रास्ते भर पहाड़ों के चेहरे मोहरे, तरह तरह की भावभंगिमाएँ देख मन खुश होता रहा। हर जगह नया नजारा, पहाड़ के इतने रूप भी हो सकते हैं मेरी कल्पना के परे था। पहाड़ न हो गए,
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