स्त्री देवी से शूद्रा तक
इतिहास और साहित्य दोनो में थोड़ा बहुत प्रवेश होने के कारण मुझे हमेशा लगता रहा है कि हमारे पुरातन परंपरा में इतिहास में साहित्य और साहित्य मे इतिहास का बड़ा अजीब सा घालमेल है। अधिकतर हम साहित्य में इतिहास और इतिहास मे साहित्य खोजने की भूल कर बैठते हैं, पुराणों में लिखा गया अधिकतर साहित्य की मिथक परंपरा में आता
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